खुदा क्या चाहता है !!

4 lines for times when we are not sure where life is taking us

खुदा क्या चाहता है, ये शायद साला वो खुद भी नहीं जानता
और दुनिया माने या न माने , मैं उसे नहीं मानता

सुरेन्द्र
दिसम्बर २०१२

तुम क्या जानो के तेंदुलकर हमारे लिए क्या था !!

This is a poetic tribute to Sachin Tendulkar and a generation that loved him

एक जमान था जब हम २ सवाल पूछा करते थे

एक ‘स्कोर क्या हुआ है’ और दूसरा ‘तेंदुलकर है’ ?

आज तेंदुलकर नहीं तो पहला सवाल पूछने का मन ही नहीं करता

और इंडिया कितने भी रन बना ले , आजकल हमारा दिल नहीं भरता !!

तुम क्या जानो के तेंदुलकर हमारे लिए क्या था

हमेशा की डूबती हुई नय्या का वो एक ही तो सहारा था…

तेंदुलकर हमारा ख्वाब और हमारी सच्चाई भी था

और क्या बताऊ तुम्हे वो हमारे दर्द की वजह और हमारी ख़ुशी का इन्तेजाम था!!

तेंदुलकर के रिटायर होने पे तुम खुश हो सकते हो

तुम्हारे पास द्रविड़, गांगुली, लक्ष्मण, धोनी, युवराज, रैना जो थे…

पर हमे माफ़ करना, हम गम छुपा नहीं सकते

क्यों की आज की दुनिया मैं अब और तेंदुलकर नहीं बनते !!

तुम क्या जानो के तेंदुलकर हमारे लिए क्या था

वो हमारे सब सवाल और सब सवालों का जवाब था…

सच कहेता हु यारों दुनिया के हजारों Goliath थो के लिए

हमारे पास हमेशा वो सिर्फ एक ही तो davidथा!!

सुरेन्द्र

दिसम्बर २०१२

खूप दिवसात काही लिहिलं नाही !!

खूप दिवसात काही लिहिलं नाही, लिहावं असं काही घडलचं नाही

कुणी गालातल्या गालात हसलं नाही, कि धाय मोकलून रडलं नाही

सगळं कसं शांत आहे, कळत नाही कि वादळ मागे आहे कि पुढे आहे

आभाळ आणि मन दोन्ही भरून आलय, पाउस काही पडणार याची मात्र खबर नाही

हरवलं काहीच नाहीये, पण सगळेच काहीतरी शोधतायत

ऐकत कुणीच नाहीये, पण सगळेच काहीतरी बोलतायत

एवढ्या सगळ्या धावपळीत भावना कुठे तरी कोमेजतायत

गर्दी वाढलीये, पण माणस कुठेतरी हरवतायत!!

सुरेंद्र

मे २०१२

कविता म्हणजे !!

An effort to document the reasons where people find inspirations to write poems.

 

कविता म्हणजे सोप्या भावना कठीण शद्बात व्यक्त करणं                                             आणि जुळत नसलं तरी यमक जुळवत रहाणं

कविता म्हणजे शब्दांच्या गर्दीत भावना लपवणं                                                         आणि सांगता येत नसेल तर सांगायचा प्रयत्न करत रहाणं

कविता म्हणजे सत्य कळत असेल तरी स्वप्नातच जगण्याचा हव्यास                          आणि कविता म्हणजे चौखूर उधळणाऱ्या मनाला हळुवार घातलेला लगाम

कविता म्हणजे तू नसताना असल्याची जाणीव                                                          आणि कधी कधी तू असतानाही जाणवलेली तुझी उणीव

कविता म्हणजे एक भास                                                                                         आणि  कधी कधी मनाला झालेला त्रास                                                                    कविता म्हणजे एक व्यंग                                                                                        आणि कधी कधी मनात उठलेले तरंग

कविता म्हणजे प्रेम                                                                                                आणि कधी कधी चुकलेला नेम                                                                               कविता म्हणेज रंगलेला डाव                                                                                    आणि कधी कधी विस्कटलेला गेम

कविता म्हणजे आपण दोघे                                                                                             आणि कधी कधी फ़क़्त मी                                                                                               कविता म्हणजे बहरलेलं झाड                                                                                         आणि कधी सुकून गेलेली बी

कविता म्हणेज मनानी घेतलेला झोका                                                                      आणि कधी कधी हुर्दयाचा चुकलेला ठोका                                                                  खरच सांगतो तुला कविता म्हणजे मनाला लागलेली एक आस                                     आणि कधी कधी फ़क़्त timepass

Surendra ( June 2012)

न मैं आपको तब जानता था !!

न मैं आपको तब जानता था, न मैं आपको अब जानता हु
पर इस बीच जो गुजरा , वो एक हसीं सपना था ये जरुर मानता हु

आप बिछड़े कुछ इस तरह के अब लगता है के काश आप मिले ही न होते
बोहोत सारी खुशियों के बाद हमारी जिंदगी मैं ये आसूं तो न होते..

आपकी आखों में नफरत देखकर हुआ है आज ये एहसास,
शायद मेरे दोस्त, तुजे हमेशा से ही थी और किसी की तलाश..

मिलेंगे जिंदगी में कभी तो बस इतना रखना याद
भले २ पल के लिए ही सही , हमारा आपका रहा साथ

सुरेन्द्र फाटक
मार्च २००४

 

आभाळाची आबाळ..

कधी विचार केलाय कि सूर्याच्या घरात अंधार झाला तर दिवा कोण लावेल
आणि आभाळाचे कपडे फाटले तर ठिगळ कुठून येयील?

आयुष्यात आपण सूर्यच शोधात असतो ,
पण त्याच्याही घरात अंधार असू शकतो हा विचार आपल्या गावी हि नसतो..

आपल्याला झाकणार्या आभाळाला हि निवारा लागतो हे आपल्याला कळत नसतं
आणि त्या आभाळाला ते माहित असूनही ते आपल्या ला सांगत नसतं..

सूर्याच्या घरात उजेड करायला सूर्य बनायची गरज नसते पण काजवा बनायचीहि आपली दानात नसते आणि आभाळाची आबाळ कायमच आपल्या कडून होत असते !!!

सुरेंद्र फाटक
फेब्रुवारी २००४

माणूसच आहे मी / After all I am just a human

I am a man of too many words..
मी नेहेमीच फार बोलतो, मनातल्या दुखा;ला झाकायला शब्दांची चादर शोधतो

I am a man of history…
मी नेहेमी इतिहासातच जगतो, इतरांच्या भूतकाळात नेहेमी स्वताच्या वर्तमानाला बघतो

I am a man of mystery..
मी कायमच गूढ बनून राहतो, आयुष्याचं कोडं सोडवताना स्वतःच हरवत असतो

I am a man of hurt…
मी नेहेमीच जखमा जपत असतो, नवीन खपल्या येण्यासाठी जुन्या पुन्हा पुन्हा उकरत असतो

After all I am just a human..
माणूसच आहे मी , काही सुचेनासं झालं कि उगाचंच अश्या कविता लिहितो

Surendra Phatak
Feb 2004

मी फेसबुक वर कविता टाकली / I posted a poem on FB !!

मी फेसबुक वर कविता टाकली , आणि ती तू लाईक केली
माझी colour दुनिया मित्रा, तू एका मिनिटात black & white केली

तश्या बऱ्याच comments आल्या, त्यात तुझी पण आली
आणि कविता फ़क़्त तुलाच कळली अस काहीतरी सांगून गेली

पुढे पुढे धावणारी माझी पाऊलं , रेंगाळून काही क्षण मागे वळली
आणि फेसबुक ची अख्खी timeline मित्रा, एका क्षणात डोळ्यापुढे तरळली

Surendra
Sept 2012

जिंदगी गयी तेल लेने !!

जिंदगी गयी तेल लेने, और मौत जाये भाड में !!
कौन यहाँ रुका है , किसी की याद में !!

सूरज निकले सुबह, या चाँद निकले रात में
तुझे तो आखिर मिलना ही है , तेरी चिता की राख में

सुरेन्द्र
Dec 2012

कविता मैं grammar !!

कविता मैं grammar की गलतियाँ देख पाना भी एक कला है
और ताजमहल मैं मुमताज को महेसुस करना , ऐसे लोगो को मना है !!

भावना जहा पोहोच गयी , शब्द वहा सिर्फ एक बहाना है
तुम्हारे लिए जिंदगी एक सच्चाई , और हमारे लिए एक फ़साना है !!

सुरेन्द्र

Dec 2012