जिंदगी गयी तेल लेने, और मौत जाये भाड में !!
कौन यहाँ रुका है , किसी की याद में !!
सूरज निकले सुबह, या चाँद निकले रात में
तुझे तो आखिर मिलना ही है , तेरी चिता की राख में
सुरेन्द्र
Dec 2012
जिंदगी गयी तेल लेने, और मौत जाये भाड में !!
कौन यहाँ रुका है , किसी की याद में !!
सूरज निकले सुबह, या चाँद निकले रात में
तुझे तो आखिर मिलना ही है , तेरी चिता की राख में
सुरेन्द्र
Dec 2012
कविता मैं grammar की गलतियाँ देख पाना भी एक कला है
और ताजमहल मैं मुमताज को महेसुस करना , ऐसे लोगो को मना है !!
भावना जहा पोहोच गयी , शब्द वहा सिर्फ एक बहाना है
तुम्हारे लिए जिंदगी एक सच्चाई , और हमारे लिए एक फ़साना है !!
सुरेन्द्र
Dec 2012
हर रोज मेरी जिंदगी थोड़ी और धुल खाती है
शायद इसीलिए हर रात मेरे दिमाग मैं एक नयी कविता आती है!!
कैसे बयां करू मैं अपने सपनो की मजबूरी ,
के उनमें भी हर वक़्त मुजे सच्चाई नजर आती है !!
सुरेन्द्र
दिसम्बर २०१२