जिंदगी गयी तेल लेने !!

जिंदगी गयी तेल लेने, और मौत जाये भाड में !!
कौन यहाँ रुका है , किसी की याद में !!

सूरज निकले सुबह, या चाँद निकले रात में
तुझे तो आखिर मिलना ही है , तेरी चिता की राख में

सुरेन्द्र
Dec 2012

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